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चार धाम की यात्रा बद्रीनाथ केदारनाथ – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री

चार धाम की यात्रा बद्रीनाथ केदारनाथ – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री.

उत्तराखंड में गंगोत्री, यमुनोत्री, और बद्रीनाथ की यात्रा को ही चार धाम की यात्रा माना जा रहा है . 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हो गई थी, लेकिन केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल रविवार और 30 अप्रैल सोमवार को खुले। चारों मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही आधिकारिक रूप से चार धाम की यात्रा शुरू हो गई है। इन चारों तीर्थ स्थलों पर आप कैसे पहुंच सकते हैं और यात्रा के दौरान आपको कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए

छोटा चार धाम : बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या और इसके उत्तर भारत में होने के कारण यहां के वासी इसी की यात्रा को ज्यादा महत्व देते हैं इसीलिए इसे छोटा चार धाम भी कहा जाता है। इस छोटे चार धाम में बद्रीनाथ के अलावा केदारनाथ (शिव ज्योतिर्लिंग), यमुनोत्री (यमुना का उद्गम स्थल) एवं गंगोत्री (गंगा का उद्गम स्थल) शामिल हैं।

चार धाम की यात्रा बद्रीनाथ केदारनाथ.

1. यमुनोत्री

यमुनोत्री को चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव कहा जाता है। यहां यमुना का पहाड़ी शैली में बना मनमोहक मंदिर है और मंदिर के पास ही खौलते पानी का स्रोत है जो तीर्थ यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है। यमुनोत्री पहुंचने के लिए आप दिल्ली से देहरादून या ऋषिकेश तक हवाई यात्रा या रेल यात्रा से पहुंच सकते हैं। यहां से आगे सड़क मार्ग और आखिरी कुछ किलोमीटर पैदल चलकर यमुनोत्री पहुंच सकते हैं.

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गंगोत्री है दूसरा पड़ाव 
चारधाम यात्रा का दूसरा पड़ाव गंगोत्री है। यमुनोत्री के दर्शन कर तीर्थ यात्री गंगोत्री में गंगा माता की पूजा के लिए पहुंचते हैं। गंगा का प्राकृतिक स्रोत गोमुख ग्लेश्यिर गंगोत्री से 18 किलोमीटर दूर है। यमुनोत्री से गंगोत्री की सड़क मार्ग से दूरी 219 किलोमीटर है जबकि ऋषिकेश से गंगोत्री की दूरी 265 किलोमीटर है और वहां से वाहन से सीधे पहुंचा जा सकता है।

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कैसे पहुंचे केदारनाथ?
चारधाम यात्रा का तीसरा पड़ाव केदारनाथ धाम है जो उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में आता है। ऋषिकेश से गौरीकुण्ड की दूरी 76 किलोमीटर है और यहां से 18 किलोमीटर की दूरी तय करके केदारनाथ पहुंच सकते हैं। केदारनाथ और लिंचैली के बीच 4 मीटर चौड़ी सीमेंटेड सड़क बना दी गई है जिससे श्रद्धालु आसानी से केदारनाथ पहुंच सकते हैं।

कैसे पहुंचे बद्रीनाथ?
बद्रीनाथधाम तक गाड़ियां जाती हैं, इसलिए यहां मौसम अनुकूल होने पर पैदल नहीं जाना पड़ता। बद्रीनाथ को बैकुण्ठ धाम भी कहा जाता है। यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर, रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली और गोविन्दघाट होते हुए पहुंचा जा सकता है। ain’t give up. Never surrender.

कई और खूबसूरत मंदिर 
केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच कई और मंदिर भी हैं जिनके दर्शन तीर्थ यात्री कर सकते हैं। इनमें भविष्यबद्री मंदिर, नृसिंह मंदिर, बासुदेव मंदिर, जोशीमठ जैसे मंदिर बद्रीनाथ यात्रा मार्ग के आसपास हैं जबकि केदारनाथ मार्ग पर विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, मदमहेश्वर मंदिर, महाकाली मंदिर कालीमठ, नारायण मंदिर, तुंगनाथ मंदिर शामिल है। इसके अलावा 5 प्रयागों में से रूद्रप्रयाग, देवप्रयाग केदार मार्ग पर और कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और विष्णुप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर पड़ते हैं। चारधाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु और तीर्थ यात्री इन मंदिरों में भी जाते हैं।

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यात्रा के दौरान इन चीजों का रखें ध्यान 
– सिर्फ चारधाम यात्रा ही नहीं बल्कि किसी भी यात्रा के दौरान आपको अपनी जरूरी दवाइयां हमेशा साथ रखनी चाहिए।
– इसके अलावा छोटी-मोटी सामान्य परेशानियों जैसे- पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द, बुखार की दवा के अलावा क्रीम और पेनरिलीफ स्प्रे भी साथ रखना चाहिए।
– यात्रा के दौरान गर्म और ऊनी कपड़े साथ रखें क्योंकि इस क्षेत्र का मौसम हमेशा ठंडा रहता है और ऊंचाई पर तो ठंड ज्यादा बढ़ जाती है।
– इसके अलावा एक अच्छा टॉर्च भी साथ जरूर रखें।
– हो सके तो चारधाम की यात्रा अकेले करने की बजाए दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ करें क्योंकि रूट चैलेंजिंग होने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

कब जाएं?
वैसे तो चारधाम यात्रा हर साल अप्रैल महीने में शुरू होती है और अक्टूबर-नवंबर में खत्म हो जाती है लेकिन सितंबर का महीना इस यात्रा का पीक सीजन होता है क्योंकि जून से अगस्त के बीच इस इलाके में भारी बारिश होती है जिसकी वजह से तीर्थ यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सितंबर चारधाम यात्रा पर जाने का सबसे बेस्ट समय है क्योंकि बारिश के बाद पूरी घाटी धुली हुई और फ्रेश हो जाती है, चारों तरफ हरियाली नजर आने लगती है और यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही बनती है।

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